Saturday, 24 October 2026
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UP Me Sarkari Doctors Ko 65 Ke Bad Bhi Milega Bada Mauka , Ab 70 Sal Tak De Sakenge Sewaye

UP Me Sarkari Doctors Ko 65 Ke Bad Bhi Milega Bada Mauka , Ab 70 Sal Tak De Sakenge Sewaye

 उत्तर प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों की सेवाओं को लेकर सरकार बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने सेवानिवृत्ति के बाद योग्य चिकित्सकों को 70 साल की उम्र तक पुनर्नियुक्ति देने की व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. मौजूदा व्यवस्था में सरकारी डॉक्टर 65 साल की आयु तक सेवाएं देते हैं. नई व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्त होने के बाद भी योग्य डॉक्टरों को दोबारा नियुक्त कर 70 साल तक उनकी सेवाओं का लाभ लिया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि इससे सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में अनुभवी चिकित्सकों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा
 70 साल तक काम कर सकेंगे योग्य डॉक्टर
स्वास्थ्य विभाग में पुनर्नियुक्ति से जुड़े औपचारिक आदेश की प्रक्रिया अपर मुख्य सचिव स्तर से तेज कर दी गई है. इसके लागू होने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले योग्य चिकित्सकों को उनकी विशेषज्ञता और जरूरत के आधार पर 70 साल की उम्र तक दोबारा सेवा का मौका मिल सकता है. प्रदेश के सरकारी अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में अनुभवी डॉक्टरों की उपलब्धता लंबे समय तक बनाए रखने से मरीजों को विशेषज्ञ सलाह और उपचार की सुविधा मिलने की उम्मीद है.
विभागों में मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि “प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग प्रमुख संवर्ग है और इसके डॉक्टरों के अनुभव से स्वास्थ्य सेवाओं को सीधा फायदा पहुंचेगा.” उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन चिकित्सा विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, वहां पुनर्नियुक्ति की यह व्यवस्था खास तौर पर उपयोगी साबित हो सकती है. अनुभवी चिकित्सकों की सेवाएं जारी रहने से अस्पतालों में विशेषज्ञ परामर्श की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
 स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने पर भी फोकस
सरकार की इस पहल में ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है. सीएचसी और पीएचसी स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी लंबे समय से एक चुनौती रही है. ऐसे में सेवानिवृत्त लेकिन योग्य और अनुभवी चिकित्सकों की सेवाएं जारी रहने से ग्रामीण मरीजों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलने की उम्मीद है.

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