Friday, 23 October 2026
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Akhilesh Yadav Ki Rampur Jel Me Aazam Khan Se Hone Wali Mulaqat Ke Kya Hai Mayane? Janiya Puri Inside Story

Akhilesh Yadav Ki Rampur Jel Me Aazam Khan Se Hone Wali Mulaqat Ke Kya Hai Mayane? Janiya Puri Inside Story

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आज पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान से मिलने रामपुर पहुंच रहे हैं. दोनों के बीच आमने-सामने की मुलाकात जल्द होने वाली है. भले ही कानूनी पेंच के चलते आजम खान, उनकी पत्नी और उनके बेटे खुद चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं हैं. फिर भी पश्चिम उत्तर प्रदेश और खासकर मुस्लिम सियासत में आज भी उनका प्रभाव सबसे बड़ा माना जाता है. जौहर यूनिवर्सिटी पर मंडराते कानूनी संकट, विपक्षी दलों की घेराबंदी और आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को साधने के लिहाज से अखिलेश यादव और आजम खान की होने वाली यह मुलाकात उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गई है.


मुलाकात के राजनीतिक मायने
तय कार्यक्रम के अनुसार अखिलेश यादव का हेलीकॉप्टर सीधे जौहर यूनिवर्सिटी के ग्राउंड में उतरेगा. इसके बाद वे रामपुर जेल पहुंचकर आजम खान से मुलाकात करेंगे.


वर्तमान में मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर इनकम टैक्स और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का शिकंजा कसता जा रहा है. यूनिवर्सिटी पर अनकाउंटेड फंड और अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं, जिससे आजम खान के लिए यह उनके राजनीतिक वजूद का सबसे बड़ा संकट बन गया है. यही वजह है कि इस मुलाकात में जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने और इसे मुख्य राजनीतिक मुद्दा बनाने पर प्रमुखता से चर्चा होने की पूरी संभावना है.
विपक्षी दलों की नजर और मुस्लिम सियासत की खींचतान
हाल के दिनों में असदुद्दीन ओवैसी ने रामपुर पहुंचकर आजम खान के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी को घेरने की कोशिश की है. वहीं स्वामी प्रसाद मौर्य की राहुल गांधी से मुलाकात और उसके बाद रामपुर के समीकरणों को साधने की सुगबुगाहट ने भी हवा तेज कर दी है.


हालांकि कांग्रेस और उसके स्थानीय नवाब परिवार (नूरबानो का परिवार) से आजम खान की पुरानी राजनीतिक अदावत रही है. फिर भी मुस्लिम वोट बैंक पर पकड़ बनाए रखने के लिए सपा किसी भी तरह का जोखिम मोल लेना नहीं चाहती।


2027 के चुनाव और सीटों का समीकरण
जानकारों का मानना है कि मुरादाबाद मंडल और आसपास के इलाकों की करीब 30 विधानसभा सीटों पर आजम खान का सीधा होल्ड और प्रभाव है. अखिलेश यादव इन सीटों पर उनकी अनदेखी नहीं कर सकते.
चर्चा है कि आगामी चुनावों के मद्देनजर टिकट बंटवारे, संभावित उम्मीदवारों और आने वाले चुनावों को लेकर आजम खान अपनी शर्तें और सियासी सुझाव रख सकते हैं. ओवैसी और अन्य दलों द्वारा मुस्लिम नेतृत्व के नाम पर सपा पर बनाए जा रहे दबाव के बीच यह मुलाकात समाजवादी पार्टी के लिए डैमेज कंट्रोल और बड़ी रणनीति तय करने का मुख्य आधार साबित होगी.

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