गोरखपुर नगर निगम के वार्ड संख्या 43, शाहपुर की पार्षद ज्ञानती देवी पत्नी परशुराम का नामांकन एवं निर्वाचन निरस्त कर दिया गया है। वह पूर्व पार्षद एवं नगर निगम के पूर्व उपसभापति चंद्रशेखर सिंह की माता हैं। एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट (महिलाओं के विरुद्ध अपराध) की कोर्ट ने 23 जुलाई, गुरुवार को यह फैसला दिया है। इसकी कॉपी जिला निर्वाचन अधिकारी नगरीय निकाय को भेज दी गई है। जिला निर्वाचन अधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि अभी आदेश का अवलोकन नहीं कर सके हैं। कोर्ट का जैसा आदेश होगा, उसके अनुसार कार्यवाही की जाएगी। याचिका में तथ्यों को छुपाने का आरोप लगाया गया था। जिसे कोर्ट ने सही माना है।
वार्ड नंबर 43, 2023 के नगरीय निकाय चुनाव में महिला के लिए आरक्षित थी। पूर्व पार्षद चंद्रशेखर सिंह ने अपनी माता ज्ञानती देवी पत्नी स्व. परशुराम को यहां से चुनाव लड़ाया था। उन्हें भाजपा का टिकट भी मिला था। लेकिन यहीं से आम आदमी पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ने वाली प्रत्याशी अर्चना शुक्ला ने उनके नामांकन एवं निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका जिला जज के यहां दाखिल की थी। जहां से एडीजे कोर्ट को मामले का निस्तारण करने के लिए वाद स्थानांतरित किया गया था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
एडीजे सुदेश कुमार की कोर्ट ने याची अर्चना शुक्ला की ओर से प्रस्तुत चुनाव याचिका 05/2023 को स्वीकार करते हुए विपक्षी संख्या 1 यानी ज्ञानती देवी पत्नी स्व. पशुराम का नामांकन/निर्वाचन उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम की धारा 71 की उप धारा b तथा d (i) के तहत अवैध एवं शून्य घोषित किया है। आवश्यक कार्रवाई के लिए आदेश की कॉपी जिला निर्वाचन अधिकारी के पास भेजी गई है।
भाजपा का सिंबल न मिलने का आरोप
याचिनी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि ज्ञानती देवी की ओर से कई तथ्य छुपाए गए हैं। आरोप था कि ज्ञानती देवी को भाजपा का सिंबल मिला ही नहीं था। सिंबल ज्ञानती देवी पत्नी श्यामलाल के नाम से जारी था। जबकि विपक्षी ज्ञानती देवी ने ज्ञानती देवी पत्नी परशुराम के नाम से नामांकन दाखिल किया था। कोर्ट के समक्ष बहस के दौरान तत्कालीन महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता का शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया गया। इसमें उन्होंने कहा था कि विपक्षी संख्या एक यानी ज्ञानती देवी के अलावा और कोई आधिकारिक प्रत्याशी नहीं था। लेकिन पति के नाम गलत होने के लेकर कोई तथ्य नहीं प्रस्तुत किया जा सका। राजेश गुप्ता की ओर से यह बताया गया कि उन्हें चुनाव के एक महीने बाद पता चला कि ज्ञानती देवी के पति का नाम परशुराम उर्फ श्यामलाल है।
जानिए और से कौन तथ्य हैं, जिसे छुपाने का आरोप है
याचिनी का आरोप था कि ज्ञानती देवी ने कई और तथ्य छुपाए हैं। उनके नाम से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास आवंटित है। इसे उन्होंने छुपा लिया। शपथ पत्र में इसकी जानकारी नहीं दी। इसके साथ ही उनके नाम से 3 हजार वर्ग फीट से अधिक कीमती जमीन खरीदी गई थी, यह तथ्य भी छुपा लिया गया। देवरिया जिले के बरहज स्थित अपने गांव में वह 2021 में प्रधानी का चुनाव लड़ चुकी थीं, वहां की मतदाता सूची में नाम होने की बात भी छुपा ली गई।